History of Yoga (योग का इतिहास)

🕉️ योग का इतिहास (योग की विस्तृत जानकारी)

1. वैदिक काल में योग का इतिहास

योग की शुरुआत भारत की प्राचीन वैदिक सभ्यता में हुई मानी जाती है।

  • ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद में ध्यान, तपस्या और एकाग्रता का उल्लेख मिलता है।
  • उस समय ध्यान, मंत्र-जप और यज्ञ के माध्यम से ऋषि-मुनि आत्म-साक्षात्कार का प्रयास करते थे।
  • योग उस समय ध्यान और तप के रूप में अस्तित्व में था।

2. उपनिषद काल में योग का इतिहास

  • योग का दार्शनिक और आत्मिक स्वरूप उपनिषदों में प्रकट होता है।
  • “कठोपनिषद”, “श्वेताश्वतर उपनिषद”, “मुण्डकोपनिषद” में आत्मा और ब्रह्म की एकता की चर्चा की गई है।
  • ध्यान, प्राणायाम, मौन, और ब्रह्मज्ञान जैसे योग के आयाम इस काल में उभरे।

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3. महाभारत और भगवद्गीता काल में योग का इतिहास

  • योग का व्यावहारिक और जीवनोपयोगी रूप इस काल में मिलता है।
  • भगवद्गीता में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को योग के तीन प्रमुख मार्ग बताए:
    • कर्म योग – बिना फल की इच्छा के कार्य करना।
    • भक्ति योग – ईश्वर में समर्पण।
    • ज्ञान योग – आत्मा और ब्रह्म की पहचान।
  • गीता योग को “योग: कर्मसु कौशलम्” कहती है – यानी कार्यों में दक्षता ही योग है।

4. पतंजलि योगसूत्र में योग का इतिहास

  • महर्षि पतंजलि ने योग को एक दर्शन के रूप में व्यवस्थित किया।
  • उनकी कृति “योगसूत्र” योग दर्शन का सबसे प्रसिद्ध ग्रंथ है।
  • उन्होंने अष्टांग योग की संकल्पना दी:
    1. यम (नैतिक अनुशासन)
    2. नियम (आत्म-अनुशासन)
    3. आसन (शारीरिक स्थिति)
    4. प्राणायाम (श्वास नियंत्रण)
    5. प्रत्याहार (इंद्रियों की वापसी)
    6. धारणा (एकाग्रता)
    7. ध्यान (मेडिटेशन)
    8. समाधि (आत्मा-परमात्मा की एकता)

5. हठयोग काल में योग का इतिहास

  • इस काल में योग का शारीरिक पक्ष मजबूत हुआ।
  • नाथ संप्रदाय के योगियों – जैसे गोरखनाथ और मत्स्येन्द्रनाथ – ने हठयोग को प्रचारित किया।
  • प्रमुख ग्रंथ:
    • हठयोग प्रदीपिका – स्वामी स्वात्माराम द्वारा
    • शिव संहिता – शरीर और ऊर्जा प्रणाली का गहरा विवेचन
    • गेरंड संहिता – 32 आसनों और सात योग-अंगों का वर्णन
  • इस युग में योग का प्रयोग शरीर और मन को साधकर आत्मोन्नति के लिए किया गया।

6. आधुनिक काल में योग का इतिहास

  • योग को देश और विदेश में पुनर्जीवित करने वाले महापुरुष:
    • स्वामी विवेकानंद – 1893 में शिकागो धर्म संसद में योग और वेदांत का प्रचार किया।
    • परमहंस योगानंद – क्रियायोग को अमेरिका में प्रसिद्ध किया।
    • स्वामी शिवानंद – दिव्य जीवन मिशन से योग का प्रचार।
    • बी.के.एस. अयंगर – अयंगर योग के माध्यम से आसनों की गहराई से व्याख्या।
    • पत्थाभि जोइस – अष्टांग विन्यास योग
    • बाबा रामदेव – योग को घर-घर तक पहुँचाया, विशेषतः प्राणायाम व घरेलू चिकित्सा के माध्यम से।

7. अंतर्राष्ट्रीय मान्यता (21वीं सदी)

  • भारत सरकार के प्रयास से 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया।
  • 2015 से यह दिन विश्वभर में मनाया जाता है।
  • लाखों लोग योगाभ्यास के माध्यम से स्वास्थ्य लाभ, मानसिक शांति और आध्यात्मिक विकास की ओर बढ़ रहे हैं।
  • अब योग सिर्फ साधना नहीं, स्वास्थ्य और जीवनशैली सुधार का वैश्विक माध्यम बन चुका है।

🧘‍♂️ योग का महत्व (Why Yoga is Important)

  • यह शरीर, मन और आत्मा का संतुलन बनाता है।
  • तनाव, अनिद्रा, मधुमेह, मोटापा, अवसाद जैसे रोगों में लाभदायक।
  • जीवन में अनुशासन, आंतरिक शांति और जागरूकता लाता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

योग भारत की वह अमूल्य धरोहर है, जो केवल धार्मिक या शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि एक पूर्ण जीवनशैली है। यह शरीर की शक्ति, मन की शांति और आत्मा की जागरूकता को एक साथ जोड़ता है। योग का इतिहास बताता है कि यह विज्ञान, दर्शन और साधना – तीनों का संगम है।